गणेश चतुर्थी 2026 पूजा विधि — घर पर गणपति स्थापना

गणेश चतुर्थी 2026 के दिन गणपति बप्पा की पूरी विधि से पूजा कैसे करें? यहां हम आपको चरणबद्ध गणेश चतुर्थी पूजा विधि बता रहे हैं। इस मार्गदर्शिका की सहायता से आप घर पर ही विधि-विधान से गणेश स्थापना कर सकते हैं। पूजा की शुरुआत मंगलाचरण से होती है, जिसमें गणेश जी का आवाहन, प्राण प्रतिष्ठा, आसन मंत्र, अर्घ्य, पाद्य और स्नान शामिल हैं। पहले पूजा की तैयारी करनी चाहिए, फिर पूरी षोडशोपचार पूजा कर सकते हैं।

चरण १ — पूजा की तैयारी

किसी भी पूजा के लिए तैयारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। पहले स्नान करें और शुद्ध वस्त्र पहनें। पूजा का स्थान तैयार करें — जहां मूर्ति स्थापित करनी है, उस स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। एक चौकी या पट्टा लें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं। पूजा सामग्री को एक थाली में रखें। सभी सामग्री पास में रखें ताकि पूजा के दौरान कोई वस्तु छूट न जाए। दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं। गणेश चतुर्थी 2026 की पूजा के लिए सामग्री सूची — मूर्ति, चौकी, लाल कपड़ा, चावल (अक्षत), हल्दी, कुमकुम, चंदन, फूल और माला, धूप, दीपक, अगरबत्ती, कपूर, मोदक, लड्डू, फल, पान, सुपारी, लौंग, दूर्वा (२१ गुच्छे), गंगाजल, कलश, नारियल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), आरती की थाली, घंटी।

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चरण २ — संकल्प और आवाहन

पूजा में पहले संकल्प करते हैं। हाथों में जल लेकर गणेश जी का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। फिर आवाहन करते हैं — भगवान को निमंत्रण देते हैं। मंत्रों के साथ उन्हें आसन पर आने का निमंत्रण दें। आवाहन के बाद आसन समर्पण करें। फिर पाद्य (पैर धोने के लिए जल), अर्घ्य (हाथ धोने के लिए जल) और आचमन (मुख धोने के लिए जल) अर्पित करें। उसके बाद स्नान कराएं — पंचामृत से स्नान, फिर गंगाजल से स्नान और फिर शुद्ध जल से स्नान। स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र अर्पित करें और यज्ञोपवीत पहनाएं।

चरण ३ — षोडशोपचार पूजा

अब आता है षोडशोपचार पूजा का भाग। गणेश जी की पूजा षोडशोपचार से होती है जिसमें सोलह उपचार होते हैं। पहले चंदन लगाएं। गणेश जी को चंदन बहुत प्रिय है। फिर अक्षत (बिना टूटे चावल) उनके चरणों में अर्पित करें। अक्षत को पूजा में संपूर्णता और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। फिर पुष्प और माला चढ़ाएं। गणेश जी को लाल रंग के फूल और गरम मसाले बहुत पसंद हैं। अतः लाल फूल जैसे गुलाब, चमेली और पलाश के फूल चढ़ाएं। गणेश जी को दूर्वा चढ़ाना सबसे विशेष होता है। दूर्वा २१ या १०८ गुच्छों में चढ़ाते हैं। इसके बाद धूप और दीपक दिखाएं। फिर नैवेद्य (भोग) अर्पित करें। मोदक और लड्डू गणेश जी के प्रिय भोग हैं।

चरण ४ — आरती और मंत्र

पूजा के अंत में गणेश आरती करना बहुत महत्वपूर्ण है। सुखकर्ता दुखहर्ता यह सबसे प्रसिद्ध गणेश आरती है। आरती के दौरान घंटी बजाते रहें, जिससे वातावरण शुद्ध होता है। आरती के बाद कपूर से आरती करें। इसके बाद सभी आरती का प्रकाश लें और आशीर्वाद प्राप्त करें। गणेश जी के प्रमुख मंत्र हैं — ॐ गण गणपतये नमः, वक्रतुंड महाकाय, और गणेश गायत्री मंत्र। इन मंत्रों का कम से कम १०८ बार जप करें।

चरण ५ — प्रसाद वितरण

पूजा के बाद प्रसाद सभी को बांटना चाहिए। मोदक, लड्डू और फल प्रसाद के रूप में दिए जाते हैं। पूजा के बाद घर के सभी लोग मिलकर प्रसाद ग्रहण करें। फिर दिन भर भजन, कीर्तन का आयोजन करें। गणेश चतुर्थी 2026 के दिन ऐसी पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। विधि के साथ भक्ति और श्रद्धा दोनों का होना आवश्यक है।

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InfoVerse Editorial Team

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